अब और नहीं

April 06, 2026
  दरवाज़े के बाहर रखी नई चप्पलों की कतार देखकर ही रमा समझ गई कि घर में फिर कोई मेहमान आया है। वह धीरे-धीरे अंदर आई। हाथ में सब्ज़ियों का थैल...Read More

खुद को मत खोना

April 06, 2026
  दोपहर का समय था। खिड़की से आती धूप सीधे पूजा के चेहरे पर पड़ रही थी, लेकिन उसे इसका एहसास तक नहीं था। वह किचन में खड़ी लगातार काम कर रही थ...Read More

रिश्तों की लौ

April 05, 2026
  रीना रसोई में खड़ी चाय बना रही थी, लेकिन उसका ध्यान बार-बार दरवाज़े की तरफ जा रहा था। आज उसके बेटे रोहन को स्कूल से देर हो रही थी। तभी दरव...Read More

नाज़ुक परवरिश

April 05, 2026
  “आर्या… बेटा धीरे-धीरे चलो… गिर जाओगी!” रीमा ने घबराकर अपनी 5 साल की बेटी को आवाज लगाई। आर्या पार्क में बाकी बच्चों को देख रही थी—कोई दौड़...Read More

औकात का आईना

April 05, 2026
  घर के दरवाज़े पर खड़ी रीमा की आँखों में थकान भी थी और उम्मीद भी। हाथ में दवाईयों का छोटा सा पैकेट था और मन में आने वाले बच्चे के सपने। आठव...Read More

खामोशी का जवाब

April 05, 2026
सुबह के 7 बजे थे। घर में अलार्म नहीं, बल्कि ऊँची आवाज़ें गूंज रही थीं। “कितनी बार कहा है, मेरे कपड़े अलग रखा कर! समझ नहीं आता तुझे?” कमला दे...Read More
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