जब खालीपन बोलने लगा

April 14, 2026
  खिड़की के पास रखी कुर्सी पर बैठी कमला अपने हाथों की रेखाओं को बार-बार देख रही थी। जैसे उन रेखाओं में बीते सालों को पढ़ने की कोशिश कर रही ह...Read More

खाली कमरा

April 13, 2026
  संध्या रोज़ की तरह उस कमरे का दरवाज़ा खोलकर अंदर आई। कमरा बिल्कुल साफ था। एक छोटा-सा पलंग, दीवार पर कार्टून का स्टिकर, खिड़की के पास रखा ए...Read More

अपनी जगह

April 13, 2026
  अनिता कुर्सी पर बैठी अपने घुटनों को हल्के-हल्के दबा रही थी। दर्द आज कुछ ज्यादा ही था। तभी फोन की घंटी बजी। “हैलो भाभी!” उधर से चहकती आवाज ...Read More

अपनी हद जानना जरूरी है

April 13, 2026
  आँगन में रखे पुराने सोफे पर बैठी मीना अपने हाथों में खर्चों की कॉपी पकड़े कुछ जोड़-घटाव कर रही थी। पेंसिल बार-बार रुक जाती, जैसे हर हिसाब ...Read More

सुनी-सुनाई बातों का सच

April 13, 2026
  बरामदे में रखी पुरानी कुर्सी पर बैठी सविता अपने हाथ में मोबाइल लिए बार-बार स्क्रीन देख रही थी। उँगलियाँ व्हाट्सऐप पर स्क्रॉल कर रही थीं, ल...Read More

अपनों का असली रिश्ता

April 12, 2026
  रीना रसोई में खड़ी रोटियाँ बना रही थी, और साथ ही बीच-बीच में बाहर बैठी अपनी सास, सरोज जी, पर नज़र डाल लेती थी। “मम्मी जी, आप फिर से दवाई ल...Read More

कीमत जो समझ में आई

April 12, 2026
दरवाज़े के बाहर खड़ी नीरा ने घंटी दबाने से पहले एक गहरी सांस ली। हाथ में मिठाई का डिब्बा था, लेकिन दिल में हल्की-सी घबराहट। आज उसके पति, अर्...Read More
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