अपनों के लिए जगह

September 04, 2026
  “सुनते हो जी… आज गाँव से चाचा जी का फोन आया था।” सुबह का समय था। रसोई से चाय की खुशबू पूरे घर में फैल रही थी। बैठक में अखबार पढ़ते हुए अरु...Read More

हिसाब बराबर

September 03, 2026
  “अगर मेरी बेटी अपने ससुराल में खुश नहीं है, तो भला मैं अपनी बहू को क्यों खुश रहने दूं? मेरी बेटी जिस दर्द से गुजर रही है, उसका हिसाब तो बर...Read More

जिस घर में माँ नहीं थी

September 02, 2026
  सुबह के करीब दस बजे थे। आंगन में धूप धीरे-धीरे फैल रही थी। पुराने मकान की दीवारों पर धूप की सुनहरी परत चढ़ गई थी। बरामदे में रखी लकड़ी की ...Read More
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