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अब हम खुद संभाल लेंगे

February 02, 2026
  सुबह के साढ़े छह बजे थे। रसोई में चाय उबल रही थी और गैस की धीमी आंच पर दाल चढ़ी थी। सरला देवी चाय छानते हुए बोलीं— “हर महीने वही तीन हज़ार...Read More

उस दिन मैं रुक गया

January 12, 2026
उस दिन सुबह कुछ अलग थी। आसमान हल्का-सा धुंधला था, जैसे सूरज भी पूरी तरह निकलने से पहले कुछ सोच रहा हो। मैं सुबह छह बजे घर से निकला। दिल में ...Read More

संघर्ष की रसोई

December 31, 2025
  “कभी-कभी ग़ुस्से और जोश में कही गई बात इंसान की ज़िंदगी का सबसे बड़ा लक्ष्य बन जाती है…” “माफ़ कीजिए… उस दिन मैंने जोश में आकर यह बात कह द...Read More

आसमान का हक

December 16, 2025
  आंगन में रखी पुरानी लकड़ी की बेंच पर बैठी शारदा बहुत देर से एक ही दिशा में देखे जा रही थी। सामने अमरूद का पेड़ था, जिसकी टहनियाँ हवा में ध...Read More

खोई हुई चप्पल

December 14, 2025
  सुबह का आसमान धूसर रंग में डूबा हुआ था। न धूप पूरी निकली थी, न बादल खुले थे। मीना ने खिड़की से बाहर देखा और लंबी साँस ली। आज फिर देर हो रह...Read More
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