जब माँ बोझ बन गई April 28, 2026 आँगन में तुलसी के पास रखा दिया बुझ चुका था, लेकिन घर के अंदर रिश्तों की रोशनी उससे भी पहले बुझ चुकी थी… सावित्री देवी दरवाज़े के पास रखी प...Read More
सही के लिए खड़ी एक बहू April 25, 2026 दरवाज़े के बाहर खड़ी रश्मि ने गहरी सांस ली… फिर धीरे से घंटी दबाई। अंदर से हंसी-ठिठोली की आवाज़ें आ रही थीं—नई बहू के स्वागत की तैयारियाँ ...Read More
किराये का कमरा, अपना आसमान April 20, 2026 रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर तीन पर भीड़ हमेशा की तरह भाग रही थी—कोई ट्रेन पकड़ने के लिए, कोई किसी को विदा करने के लिए। उसी भीड़ में एक...Read More
खाली कमरा April 13, 2026 संध्या रोज़ की तरह उस कमरे का दरवाज़ा खोलकर अंदर आई। कमरा बिल्कुल साफ था। एक छोटा-सा पलंग, दीवार पर कार्टून का स्टिकर, खिड़की के पास रखा ए...Read More
नई पहचान April 09, 2026 शहर के एक शांत मोहल्ले में सुबह की हल्की धूप घर के आँगन में फैल रही थी। घर के बाहर रंगोली बनी थी, दरवाज़े पर फूलों की झालर लगी थी और अंदर ...Read More
नाज़ुक परवरिश April 05, 2026 “आर्या… बेटा धीरे-धीरे चलो… गिर जाओगी!” रीमा ने घबराकर अपनी 5 साल की बेटी को आवाज लगाई। आर्या पार्क में बाकी बच्चों को देख रही थी—कोई दौड़...Read More
नेकी का असली साथ March 29, 2026 घर के आंगन में हल्की हवा चल रही थी, लेकिन माहौल में एक अजीब-सी खामोशी थी। दीवार पर लगी घड़ी की टिक-टिक साफ सुनाई दे रही थी। सविता जी सोफे ...Read More
बिखरे रिश्तों का फिर से जुड़ना March 24, 2026 घर के आंगन में हल्की-हल्की चहल-पहल थी, लेकिन उस चहल-पहल के बीच एक अनकही दूरी भी साफ महसूस हो रही थी। आदित्य दरवाजे पर खड़ा बाहर झांक रहा थ...Read More