अपनी थाली का सुख

February 24, 2026
  सुबह का समय था। आंगन में धूप की हल्की किरणें पड़ रही थीं। राधा रसोई में चाय बना रही थी और उसकी जेठानी पूजा आटा गूंथ रही थी। तभी बाहर गली स...Read More

घमंड का आईना

February 24, 2026
सुबह का समय था। आँगन में हल्की धूप फैली हुई थी। घर में सब लोग नाश्ते की टेबल पर बैठे थे। रीमा धीरे-धीरे सीढ़ियाँ उतरकर नीचे आई। पहले वो बहुत...Read More

दो दिलों की दूरी

February 24, 2026
सुबह की हल्की धूप आँगन में फैल रही थी। सरला जी तुलसी में पानी डालते हुए भगवान से यही प्रार्थना कर रही थीं — “हे प्रभु, बस मेरे बच्चों का घर-...Read More

सम्मान की छत

February 23, 2026
  सुबह का समय था। सर्द हवा चल रही थी। मोहनलाल जी अपने पुराने साइकिल की चेन ठीक कर रहे थे। आज फिर उन्हें दफ्तर के लिए देर हो रही थी। तभी सामन...Read More

भरोसे की डोरी

February 23, 2026
  शाम का समय था। घर के आँगन में हल्की ठंडी हवा चल रही थी। दरवाज़े पर गाड़ी रुकती है। रीना ने जैसे ही दरवाज़ा खोला, सामने उसका देवर अमित खड़ा...Read More

रोने का समय किसके पास था

February 23, 2026
  आज घर में ससुर जी का तेरहवाँ था। सुबह से ही आंगन में दरी बिछी थी। बाहर कुर्सियाँ लगी थीं। रिश्तेदारों का आना-जाना लगा हुआ था। बड़ी बहू संग...Read More
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