शाम का समय था। बाहर हल्की बारिश हो रही थी और खिड़की के शीशों पर गिरती बूंदें जैसे किसी अनकही कहानी की आवाज़ बन गई थीं। अंदर कमरे में दीपक लै...Read More
दोपहर का समय था। घर के बाहर नीम के पेड़ से छनकर आती धूप ज़मीन पर बिखर रही थी। आँगन में हल्की हवा चल रही थी और अंदर कमरे में पुराने रेडियो पर...Read More
सर्दियों की हल्की धूप आँगन में बिखरी हुई थी। हवा में ठंडक तो थी, लेकिन धूप में बैठने का अपना ही मज़ा था। सीमा ने जल्दी-जल्दी घर का काम निपटा...Read More