अब हम खुद संभाल लेंगे

February 02, 2026
  सुबह के साढ़े छह बजे थे। रसोई में चाय उबल रही थी और गैस की धीमी आंच पर दाल चढ़ी थी। सरला देवी चाय छानते हुए बोलीं— “हर महीने वही तीन हज़ार...Read More

उसके हिस्से की धूप

February 02, 2026
शाम के लगभग साढ़े आठ बज रहे थे। बस से उतरते समय सीमा के पैरों में जैसे जान ही नहीं बची थी। दिनभर खड़ी रहकर काम करना, फिर लोकल ट्रेन की धक्का...Read More

डिग्री से बड़ी समझ

February 01, 2026
दोपहर के ढाई बजे थे। ऑफिस में सन्नाटा पसरा हुआ था। एसी की ठंडी हवा में भी अरुण के माथे पर हल्की सिलवटें थीं। कंप्यूटर स्क्रीन पर एक्सेल शीट ...Read More
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