छोटे से गांव में रमेश चौधरी का एक साधारण सा घर था। घर बड़ा नहीं था, लेकिन उसमें अपनापन बहुत था। पत्नी सावित्री, बेटा निखिल और बेटी कृतिका — ...Read More
मेरा नाम कमला बाई है। उम्र 60 साल। मैं शहर के छोटे से रेलवे स्टेशन के बाहर चाय का ठेला लगाती हूँ। सुबह चार बजे उठकर चूल्हा जलाती हूँ, अदरक क...Read More
सर्दियों की कड़वी रात थी। घड़ी में दो बज रहे थे। शहर के पुराने हिस्से में स्थित त्रिपाठी परिवार का मकान आधा अंधेरे में डूबा था। अगले दिन घर ...Read More
दोपहर का समय था। घर के आँगन में धूप हल्की-हल्की फैल रही थी। शंकरलाल जी अपनी पुरानी लकड़ी की कुर्सी पर बैठे अख़बार पढ़ रहे थे। उम्र ढल चुकी थ...Read More