समझ का उजाला

March 10, 2026
  दिन की शुरुआत हो चुकी थी। खिड़की से आती धूप कमरे की दीवारों पर फैल रही थी और घर में सुबह की हलचल शुरू हो गई थी। बरामदे में चारपाई पर बैठे ...Read More

रिश्तों की असली कीमत

March 10, 2026
  सुबह का समय था। आँगन में हल्की-हल्की धूप फैल रही थी। तुलसी के पास रखा दिया अभी भी धीमे-धीमे जल रहा था और रसोई से चाय की खुशबू पूरे घर में ...Read More

बिना सास के भी सास

March 10, 2026
  सुबह का समय था। खिड़की से हल्की धूप कमरे में आ रही थी और बाहर सड़क पर दूधवाले की साइकिल की घंटी सुनाई दे रही थी। एकता अभी गहरी नींद में थी...Read More

समझ की मिठास

March 09, 2026
  सुबह का समय था। हल्की धूप आँगन में फैल रही थी और तुलसी के पास रखे दीये से हल्की खुशबू आ रही थी। कमला देवी बरामदे में चारपाई पर बैठी चाय पी...Read More

देवर का फैसला

March 09, 2026
शाम का समय था। आँगन में हल्की ठंडी हवा चल रही थी। आसमान में सूरज धीरे-धीरे ढल रहा था और पूरे घर में एक अजीब सी खामोशी फैली हुई थी। इस घर में...Read More
Powered by Blogger.