सुबह के साढ़े पाँच बजे थे। अलार्म बजने से पहले ही राधिका की नींद खुल चुकी थी। कमर में हल्का दर्द था, लेकिन आदत बन चुकी थी—दर्द से पहले ज़िम्...Read More
हल्द्वानी शहर के एक पुराने मोहल्ले में दो बहनें रहती थीं — सरोज और कविता, अपनी माँ शारदा देवी के साथ। माँ रोज़ सुबह मंदिर जाती, और लौटते समय...Read More
सुबह के सात बजे थे। पूजा आटे की लोई बना रही थी। चूल्हे पर सब्ज़ी चढ़ी थी और कुकर की सीटी आने वाली ही थी। तभी टेबल पर रखा उसका फोन लगातार कंप...Read More