हल्द्वानी शहर के एक पुराने मोहल्ले में दो बहनें रहती थीं — सरोज और कविता, अपनी माँ शारदा देवी के साथ। माँ रोज़ सुबह मंदिर जाती, और लौटते समय...Read More
सुबह के सात बजे थे। पूजा आटे की लोई बना रही थी। चूल्हे पर सब्ज़ी चढ़ी थी और कुकर की सीटी आने वाली ही थी। तभी टेबल पर रखा उसका फोन लगातार कंप...Read More
“मैं शादी करूँगा तो सिर्फ राधा से… वरना मैं ज़िंदगी भर अकेला रह लूँगा।” आकाश की आवाज़ तेज़ नहीं थी, लेकिन उसमें ऐसा ठहराव था जिसके आगे बहस ब...Read More